Monday, January 5, 2009
तेरी उम्मीद..........
उम्मीद तुमसे, न कभी, कोई रखेंगे,
करीब आयेंगे यूँ, की दिल को दूर रखेंगे,
हो गए हो तुम, जानते हैं, अब किसी चेहरे के,
सच मानो, इस बात का कोई गिला नहीं रखेंगे,
भूल कर बैठे थे शायद, भूल ही शायद,
कहा न, कोई हसरत उस जैसी, अब न कभी रखेंगे,
तुम साथ किसी के, कहीं भी, कैसे भी रहो,
ज़िन्दगी से तेरी वास्ता कोई, हाँ वो भी न रखेंगे,
तुम्हें हम याद आयें, क्या फर्क पड़ता हैं,
हम मगर, तेरी याद से फर्क तक न कोई रखेंगे,
तुम्हें अब न समझाना पड़ेगा कभी,
पहली आखिरी उम्मीद तेरी, सर आँखों पे रखेंगे,
एक बार, बस एक बार, इस कड़क सज़ा की वजह तो बता देते,
हम, फिर वही गलती दोहराने की गुंजाइश तो न रखेंगे.
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really u r .....porm,s is ....gorg,s like u dear .
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