Tuesday, March 10, 2009

ये क्या है जो सुलगता है ..


ये क्या है जो सुलगता है अन्दर कहीं....
उठता हैं धुआं तो बरसता हैं समंदर कहीं...

कुछ ऐसे तोड़ चला है हमसे रिश्ता कोई,
बहने लगा यादों से भी कतरा कतरा कहीं.....

फिर कोई मनचली हवा बहने लगी है कहीं...
फिर वहीँ दिल होने लगा है तबाह कहीं....

14 comments:

  1. Please extend your thought and imagination coming out of the in built circles.However you are good at poetry.

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  2. होली की हार्दिक् शुभकामनाएं।
    सुंदर रचना के लिए बधाईयां।
    भावों की अभिव्यक्ति मन को सुकुन पहुंचाती है।
    लिखते रहि‌ए लिखने वालों की मंज़िल यही है ।
    कविता,गज़ल और शेर के लि‌ए मेरे ब्लोग पर स्वागत है ।
    मेरे द्वारा संपादित पत्रिका देखें
    www.zindagilive08.blogspot.com
    आर्ट के लि‌ए देखें
    www.chitrasansar.blogspot.com

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  3. होली की हार्दिक् शुभकामनाएं।

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  4. ब्लॉग जगत में आपका हार्दिक स्वागत है .....
    मेरी शुभकामनाएं .............

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  5. भई वाह !
    रंग रची मंगलकामनायें ..

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  6. achchi hai ye gajal par kuch kafiyo me sandeh lag raha hai ...wese thik hai

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  7. कहीं सुना था.....ये जो उठता है....दिल में रह-रह कर.....अब्र है या गुबार है क्या है.....!!.....आपको पढ़कर याद आ गयीं.....!!!

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  8. ब्लॉग जगत में आपका स्वागत है ...........

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  9. बहुत सुंदर…..आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्‍लाग जगत में स्‍वागत है…..आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्‍दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्‍दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्‍त करेंगे …..हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।

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  10. Swagat hai,
    Kabhi yahan bhi aayen
    http://jabhi.blogspot.com

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  11. kya kahu.....achha likha hai....but i like most wht u have written about ur self....???

    Keep writting....and welcome to u and ur friend at my Blog.....

    Jai Ho Mangalmay Ho...

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  12. रमणीय प्रयास ..मेरे ब्लॉग में भी आप आमंत्रित हैं..

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