Tuesday, March 17, 2009

बढ़ना .......

कहते हैं आगे बढ़ने के लिए पिछली ज़मीन को त्यागना पड़ता हैं.....अरे कोई ये तो बताये...क्या पौधे का बढ़ना बढ़ना नहीं...जो अपनी ज़मीन से कभी जुदा होता नहीं.......लाख आंधी आये....लाख हौसले डगमगाए....टूट जाता है....पर छूटता नहीं...अपनी ज़मीन से कभी दगा करता नहीं....

2 comments:

  1. बहुत खूब लिखा पर.......यह जरूरी कतई नहीं की आगे बढ़ने के लिए अपनी जमीन को त्याग दिया जाए. जहां तक हो सके अपनी जमीन, अपनी मिट्टी से जुड़े रहना चाहिए

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  2. March me post ki gayi aapki sabhi rachnaye padhi, achchhi hai,aise hi likhti rahe yahi kamna hai.

    -----------------------------------------------"VISHAL"

    vishalvermaa.blogspot.com

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